माँ दुर्गा के विदाई का वक़्त था, और सबकी आँखें नम थी। इधर इशी अपने पैरों के सूखते आलते को देख उदास हो गयी, और दौड़ी दौड़ी माँ के पास बालकनी में आकर रोते हुए बोली- माँ, माँ देखो न मेरे पैरों से पूरा आलता हट गया।
माँ मुस्कुरातें हुए बोली - बेटा कोई बात नही नवरात्री भी तो ख़त्म हो गयी। देखों अब तो माँ दुर्गा भी जा रही हैं।

इशी थोड़ी देर चुप रही फिर परेशान होते हुए बोली- माँ तो क्या अब मै भी देवी नही रही।
मतलब कल से फिर वही सब होगा, जो 9 दिन पहले तक होता था। क्या सामने वाले अंकल फिर से टॉफी दिखाकर मुझे अपने गोद में बैठाएंगे, झूठी झूठी डरावनी कहानियाँ सुना कर मुझे बार बार बेतुके तरीके से गले लागयेंगे। और वो शर्मा आंटी, क्या वो फिर से मेरे स्कर्ट देख कर मुझे गन्दी लड़की कहेंगी। और वो गगन भैया, गगन भइया क्या फिर से बेवजह मेरे हाथ पकड़ेंगे। माँ क्या ये सब फिर से होगा मेरे आलता सूखने के बाद। माँ प्लीज नही।
इशी रोने लगती है और बोलती है- माँ प्लीज आप माता रानी से बोलो न वो ना जायें। मेरे पैरों में फिर से आलता लगा दो न। माँ, माँ प्लीज मुझे 9 दिन नही हमेशा के लिए देवी बनना है।
©Yukti